बैकुंठपुर (कोरिया)। कोरिया वन मंडल में नियमों को ताक पर रखकर निर्मित भवन को रातों-रात तोड़े जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि भवन को किसके आदेश पर तोड़ा गया, इसकी जिम्मेदारी लेने को कोई अधिकारी तैयार नहीं है। वहीं पूरे प्रकरण से दूरी बनाते हुए बैकुंठपुर रेंजर लंबे अवकाश पर चले गए हैं, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2015-16 में लगभग 5 लाख रुपये से अधिक की लागत से कोरिया वन मंडल कार्यालय परिसर में कर्मचारियों के लिए एक भवन का निर्माण कराया गया था। यह भवन पूरी तरह से अच्छी स्थिति में था और इसके जर्जर या अनुपयोगी होने का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं था।
चौंकाने वाली बात यह है कि भवन को तोड़ने से पूर्व न तो मुख्य वन संरक्षक (CCF) से अनुमति ली गई, और न ही राज्य शासन द्वारा इसे कंडम (अप्रयोज्य) घोषित किया गया। इसके बावजूद वर्तमान कोरिया वन मंडल प्रबंधन द्वारा रात के अंधेरे में भवन को तोड़कर पूरी तरह मटियामेट कर दिया गया।
सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई नियमों के विपरीत किए गए नए निर्माण से जुड़े सवालों से बचने के लिए की गई। भवन गिराए जाने के बाद अब अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं, लेकिन कोई भी खुलकर जवाब देने को तैयार नहीं है।
स्थानीय कर्मचारियों और नागरिकों में इस कार्रवाई को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि सरकारी संपत्ति को बिना अनुमति और बिना प्रक्रिया के नष्ट करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अब सवाल यह उठता है कि जब भवन पूरी तरह सुरक्षित था तो उसे क्यों तोड़ा गया? किसके मौखिक या लिखित आदेश पर यह कार्रवाई की गई? सरकारी धन की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है?
मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि उच्च स्तर पर जांच नहीं हुई, तो यह प्रकरण भविष्य में भी नियमों की अनदेखी का उदाहरण बन सकता है।

