बैकुंठपुर। कोरिया जिले में धान खरीदी केंद्रों की जांच को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जांच के नाम पर अधिकारी लगातार फील्ड में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं और सरकारी वाहनों से जमकर डीजल खर्च किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था में सुधार होता नजर नहीं आ रहा। उल्टा, धान खरीदी की पूरी जांच प्रक्रिया ही अब संदेह के घेरे में आ गई है।
जानकारी के मुताबिक जिले के विभिन्न धान खरीदी केंद्रों में यह किसी से छुपा नहीं है कि धान कहां से आ रहा है और किस राइस मिल से जुड़ा हुआ है। अधिकारियों को पूरी जानकारी होने के बावजूद किसानों से खुलेआम 41 किलो 300 ग्राम अतिरिक्त धान लिया जा रहा है। यह सब कुछ अधिकारियों की मौजूदगी में हो रहा है, फिर भी अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
अवैध धान परिवहन को लेकर की जा रही कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है। कई मामलों में धान से लदे वाहनों को पकड़ने के बाद केवल धान उतरवाकर वाहन छोड़ दिया गया। जबकि नियमों के अनुसार अवैध परिवहन में वाहन भी उतना ही दोषी होता है। ऐसे एक-दो नहीं, बल्कि कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें वाहन छोड़ने के पीछे “बड़ी मिठाई–मलाई” खाने की चर्चाएं आम हो गई हैं।
स्थिति यह है कि कुछ वाहन आज भी पटना थाना के पीछे स्थित खाली जगह में खड़े हैं, जबकि कुछ वाहनों को धान उतरवाने के बाद छोड़ दिया गया। सवाल उठ रहा है कि आखिर किन आदेशों पर और किन परिस्थितियों में इन वाहनों को छोड़ा गया। गिरजापुर में एक वाहन में धान पकड़े जाने के बाद वाहन छोड़ दिया गया, जबकि कई दिन तक वाहन वही समिति में खड़ा रखा गया था, इसी तरह बुढ़ार के दो वाहनों को छोड़े जाने की चर्चा है।इसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।
पटना क्षेत्र में धान की लगातार आवाजाही पर गश्ती के दौरान कार्रवाई की खबरें तो सामने आ रही हैं, लेकिन बाद में वाहनों को छोड़े जाने की बातें भी उजागर हो रही हैं। ग्राम संवा रांवा, तेंदुआ, मेन रोड, पटना, चिरगुड़ा, रनई, करजी, छिंदिया और कुड़ेली जैसे मार्गों से रात्रि के समय धान का अवैध परिवहन जारी है। इस दौरान राजस्व और पुलिस की गश्ती टीम वाहनों को पकड़ तो रही है, लेकिन आगे क्या कार्रवाई हो रही है, यह अब चर्चा का विषय बन चुका है।
कुल मिलाकर कोरिया जिले में धान खरीदी, जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया पारदर्शिता के अभाव में सवालों के घेरे में है।




