गेज नदी में अवैध रेत खनन से अस्तित्व पर संकट, बेखौफ चल रहा रेत माफियाओं का नेटवर्क

Chandrakant Pargir


 बैकुंठपुर। कोरिया जिले के पोड़ी तहसील क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली गेज नदी इन दिनों अवैध रेत खनन और परिवहन के चलते अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। कभी आसपास के गांवों की जीवनरेखा रही यह नदी अब रेत माफियाओं की अंधाधुंध लूट का शिकार बनती जा रही है। 

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार बड़े साल्ही, गेजी, चीतामाडा और काशी कुरी क्षेत्र से प्रतिदिन बड़े पैमाने पर रेत का अवैध खनन और परिवहन किया जा रहा है। 



सुबह 5 बजे से शाम 7 बजे तक चलता है अवैध कारोबार


गणमान्य नागरिकों का कहना है कि अवैध रेत खनन का सिलसिला प्रातः 5 बजे से शुरू होकर शाम 7 बजे तक बिना किसी रोक-टोक के जारी रहता है। इस संबंध में बचरा पौड़ी के स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ खनिज विभाग के जिला अधिकारियों को कई बार सूचित किया गया, बावजूद इसके आज तक न तो कोई प्रभावी कार्रवाई की गई और न ही रेत माफियाओं पर अंकुश लगाया जा सका।


दुर्घटनाओं का बना खतरा


नदियों से रेत निकालने के दौरान सुरक्षा मानकों की भी खुलेआम अनदेखी की जा रही है। रेत माफिया अप्रशिक्षित वाहन चालकों से ट्रैक्टर चलवा रहे हैं। इतना ही नहीं, घाट से ट्रैक्टर चढ़ाने के लिए सामने के हिस्से में दो-तीन मजदूरों को बैठा दिया जाता है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है।




मौन संरक्षण का आरोप


ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन पर मौन संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि समय रहते अवैध रेत खनन पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में गेज नदी का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो सकता है।


जनहित में कार्रवाई की मांग


स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध रेत खनन और परिवहन पर तत्काल रोक लगाई जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और नदी को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।



#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!