सरगुजा संभाग में सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद चमकीली एलईडी लाइट और प्रेशर हॉर्न की खुलेआम बिक्री, आदेश सख्त, अमल ढीला; दुकानों में बेधड़क मिल रहा सुरक्षा के लिए खतरनाक सामान

Chandrakant Pargir

 


अम्बिकापुर/ सूरजपुर/ एमसीबी/ कोरिया/ जशपुर/ बलरामपुर।। सुप्रीम कोर्ट द्वारा वाहनों में अनधिकृत तेज रोशनी वाली एलईडी लाइट, स्टोब/फ्लैश लाइट तथा कानों को नुकसान पहुँचाने वाले प्रेशर हॉर्न के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद सरगुजा संभाग में इनका धड़ल्ले से बेचना जारी है। हाईवे से लेकर शहरों के ऑटो-पार्ट्स बाज़ारों तक, जहां भी रिपोर्टर ने पड़ताल की—वहीं दुकानदारों के पास प्रतिबंधित उपकरण खुलेआम उपलब्ध मिले। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ऐसी लाइटें और हॉर्न सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं और इनका उपयोग पूरी तरह अवैध है, लेकिन सरगुजा के बाजारों में यह आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित दिखाई देता है।


इनसाइड स्टोरी के रिपोर्टर की पड़ताल— 


 इनसाइड स्टोरी के रिपोर्टर ने सरगुजा संभाग के प्रमुख ऑटो बाज़ारों में ग्राहक बनकर जांच की। जैसे ही रिपोर्टर दुकानों पर पहुंच कर पाया कि पॉपुलर, हाई-इंटेंसिटी, डीजे-स्टाइल एलईडी लाइट तथा तेज आवाज वाले प्रेशर हॉर्न के विकल्प दिखाते हुए सस्ते दर पर उपलब्ध कराने की बात करते है। किसी दुकान पर एलईडी लाइट 120 से 250 रुपये में मिल रही थी, जबकि प्रेशर हॉर्न 300 से 450 रुपये तक में उपलब्ध था। दुकानदारों ने यह भी कहा कि “चाहें तो हेडलाइट में भी लगा देंगे… पहले जैसे दिखता नहीं था, अब दिन में भी दूर से दिखेगा।” यह बयान साफ बताता है कि उन्हें यह जानकारी होने के बावजूद कि ऐसी लाइटें प्रतिबंधित हैं, उनका उपयोग बढ़ावा दिया जा रहा है।



आदेशों पर अमल नहीं—वाहन चालकों पर चालान, लेकिन दुकानदार बेखौफ


सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और परिवहन विभाग को निर्देशित किया था कि अनधिकृत लाइटें, स्टोब, नियोन लाइट, रंगीन फ्लैश लाइट, हूटर और तेज हॉर्न वाले वाहनों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। पुलिस मुख्यालय ने भी ऐसे संशोधनों को अवैध बताते हुए वाहन फिटनेस, बीमा और पंजीयन पर प्रभाव की चेतावनी दी थी,  लेकिन सरगुजा में स्थिति उलट दिखती है, वाहन चालकों का चालान जरूर बन रहा है, मगर दुकानदारों पर नाममात्र की कार्रवाई भी देखने को नहीं मिलती, नतीजतन बिक्री खुलकर जारी है, और उपयोग भी बढ़ता जा रहा है, अधिकांश दुकानदारों ने स्वीकार किया कि “चालान तो गाड़ियों का कटता है, हमारी दुकान पर कोई रोक नहीं है।” यह रवैया बताता है कि प्रशासन की कार्रवाई का प्रभाव विक्रेताओं तक नहीं पहुँच पा रहा।


चमकीली लाइट और प्रेशर हॉर्न से बढ़ रहा खतरा


ये अवैध उपकरण सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर समस्या बने हुए हैं।हाई-इंटेंसिटी एलईडी लाइटें रात में सामने से आने वाले चालकों की आंखें चौंधिया देती हैं, इससे दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, वहीं प्रेशर हॉर्न कानों को नुकसान पहुँचाने के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ाता है, कई दोपहिया और चारपहिया चालक इनकी वजह से असंतुलित होते देखे गए हैं। इसके बावजूद दुकानों में निर्बाध बिक्री जारी है।


प्रशासन की चुप्पी—क्या कार्रवाई दुकानों तक पहुंचेगी?


सरगुजा संभाग में आवागमन बढ़ने, रात में ट्रैफिक बढ़ने और दुर्घटना दर के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन बेहद अहम हैं। लेकिन जब तक प्रशासन दुकानदारों पर सीधे कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक यह व्यापार रुकने वाला नहीं है। यह सवाल अब भी बना हुआ है, क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन सिर्फ सड़क पर वाहन चालकों तक ही सीमित रहेगा, या प्रशासन बाजारों में भी सक्रियता दिखाएगा? सरगुजा संभाग में अवैध लाइट और हॉर्न की बिक्री जारी रहना यह साफ संकेत देता है कि आदेश तो सख्त हैं, लेकिन अमल बेहद ढीला है।

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