बैकुंठपुर (कोरिया)। सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा की छटा सोमवार को जिलेभर में देखने को मिली। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर शहर पूरी तरह आस्था और भक्ति में डूबा नजर आया। व्रतियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार आज शाम अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ अर्पित किया।
शहर के विभिन्न छठ घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजी हुईं, सिर पर प्रसाद की टोकरी रखे घाटों की ओर बढ़ रही थीं। पूरा वातावरण “छठी मइया की जय” के जयघोष और लोकगीतों की मधुर ध्वनि से गूंज उठा।
जोड़ा तालाब बना आस्था का प्रमुख केंद्र
बैकुंठपुर का राम मंदिर जोड़ा तालाब इस वर्ष भी व्रतियों और श्रद्धालुओं का प्रमुख आकर्षण केंद्र बना रहा। यहां सबसे ज्यादा संख्या में व्रती महिलाएं पहुंचीं। तालाब परिसर को फूलों, झालरों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया था।
तालाब के चारों ओर दीपों की कतारों ने दृश्य को मनमोहक बना दिया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ब्राह्मण समाज, देवराहा बाबा सेवा समिति ज़ के साथ कई सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय युवाओं ने मिलकर फूल, प्रसाद और चाय की व्यवस्था की। साथ ही सुरक्षा और साफ-सफाई के लिए प्रशासनिक टीम भी तैनात रही।
गढ़ेलपारा और खुटहनपारा घाटों पर रही विशेष रौनक
वहीं शहर के गढ़ेलपारा और खुटहनपारा के छठ घाटों की साज-सज्जा इस बार कुछ खास रही। गढ़ेलपारा घाट पर आकर्षक लाइटिंग और रंगीन सजावट के बीच व्रतियों ने बड़ी श्रद्धा के साथ अर्घ अर्पित किया। जलाशय के चारों ओर फूलों और दीयों से सजावट की गई थी, जिससे घाट की सुंदरता देखते ही बन रही थी।
रेड कारपेट स्वागत ने बढ़ाई खुटहनपारा घाट की शोभा
खुटहनपारा स्थित छठ घाट इस बार विशेष चर्चा में रहा। यहां गेज नदी के स्टॉप डेम से बहते झरने के किनारे व्रतियों ने अर्घ अर्पित किया। इस घाट पर श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए रेड कारपेट बिछाया गया था। व्रतियों का पुष्प वर्षा और तालियों की गूंज के बीच स्वागत किया गया। घाट की प्राकृतिक सुंदरता और बहते झरने की कलकल ध्वनि के बीच जब व्रतियों ने सूर्य देव को अर्घ दिया, तो दृश्य अत्यंत मनमोहक और भावनात्मक था।
शहर में छठ की भक्ति में डूबे रहे लोग
बैकुंठपुर के लगभग सभी मोहल्लों और वार्डों में छठ पर्व का उत्साह देखने को मिला। जगह-जगह महिलाओं ने सामूहिक रूप से छठ गीत गाए, और श्रद्धालुओं ने घाटों पर व्यवस्था बनाने में सहयोग किया। प्रशासन की ओर से बिजली, पानी और सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी।
भक्ति, सौंदर्य और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब एक ओर महिलाएं उपवास कर सूर्य देव की आराधना कर रही थीं, वहीं दूसरी ओर समाज के लोग श्रद्धा और सहयोग की मिसाल पेश कर रहे थे। मंगलवार की सुबह व्रती महिलाएं उदीयमान सूर्य को दूसरा अर्घ अर्पित करेंगी, जिसके साथ ही छठ महापर्व का विधिवत समापन होगा।


















