हल्ला है- समन्यवक की पदस्थापना को लेकर शिक्षक आरपार की लड़ाई में

Chandrakant Pargir


संकुल समन्यवक शिक्षक की नियुक्ति में भारी झोल, हल्ला यह है, सोनहत बीआरसी से चयनित ऐसे शिक्षकों को इस पद का लाभ दिया जा रहा है जो स्कूल जाने से कतराते है, हालात ये है उक्त पदस्थापना के लिए नियम कानून को दरकिनार करते हुए दर्ज संख्या पर्याप्त होने के बाद दो शिक्षको में से एक को समन्वयक बना कर शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने की दिशा में काम कर दिया गया है हालांकि उक्त पदस्थापना को शिक्षको में असंतोष है और उन्होंने हड़ताल करने का ज्ञापन सौंपा है। हल्ला है इसमे लंबी सांठगांठ की बू आ रही है।


टिकट मिलने के कयासों का हल्ला

5 अक्टूबर के आसपास आचार सहिंता लगने की संभावना जताई का रही है, टिकट वितरण को लेकर भाजपा जितना जल्दी दिखा रही उतनी की देरी करते जा रही है, हल्ला सिर्फ टिकट इसको मिलेगा और उसको मिलेगा इसी का हो रहा है, लोग मुकाबला तय कर अभी से जीत हार भी बता दे रहे है, जबकि लड़ाई अभी पूरी बाकि है, भाजपा  की छत्तीसगढ़ की दूसरी सूची यदि आज नही आई तो तय है 15 अक्टूबर के बाद नवरात्र में आएगी, वही जिसको लग रहा है कि उसे टिकट मिल रहा है वो मैदान में है जिसको लग रहा है नही मिल सकता वो दूर से मजे ले रहा है। 


पुरानो का दबाव


भाजपा की पहली सूची के बाद ऐसा लगने लगा कि भाजपा नए चेहरों के साथ मैदान में उतरेगी, जिसके बाद पुराने नेताओ का दबाव शुरू हुआ, हल्ला है कि पुराने नेताओ के दबाव के कारण भाजपा की दूसरी सूची अटक गई, हल्ला ये भी है कि भाजपा पर पुराने नेताओ ने दबाव भी बनाया है कि यदि टिकट नही दी गई तो वो खेल बिगाड़ेंगे, जिसके कारण भाजपा के शीर्ष नेता सभल गए है क्योंकि यदि उनके प्यादे मात खा गए तो ठीकरा उन पर ही फूटेगा और आगे लोकसभा चुनाव पर इसका असर पड़ेगा।  अब देखना है सूची में किस तरह के लोगो को टिकट मिलता है।


गोंडवाना और बसपा की सधी चाल

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सीट शेयरिंग देखते हुए उनकी रणनीति बेहद सधी हुई दिख रही है, बैकुंठपुर सीट को दोनो पार्टी में सामान्य घोषित कर रखा है, यदि कोई कांग्रेस भाजपा से नाराज होकर इस गठबंधन से लड़ता है तो उसे 25 हजार वोटों का सीधा फायदा हो सकता है, जो निर्दलीय से बेहतर होगा और वो चुनाव के पूरे समीकरण को बिगाड़ सकता है। लगभग 20 हजार वोट गोंगपा और 5 हजार वोट बसपा के फिक्स है। ऐसा कहा जाता चुनावी समीकरण कभी बदल सकते है, ऐसे में कांग्रेस और भाजपा के टिकट वितरण पर सबकी नजर है, इन पार्टी से कौन बागी होकर मैदान में सामने आता है। इसी तरह से गोंगपा औऱ बसपा ने हर सीट पर मंथन कर सीट का बंटवारा किया है।


आनन फानन में लोकार्पण 


चुनाव अब सर पर है ऐसे में नेता अब निर्माण कार्यों का लोकार्पण करने में जुट गए है, हल्ला ये है कि न तो भवन का कार्य पूर्ण हो पाया है, शौचालय अधूरा है, बिजली फिटिंग अधूरी है, साज सज्जा अधूरा है, सिर्फ सामने से पुताई करवा कर जैसे तैसे लोकार्पण करा दिया जा रहा है, ताकि नाम लिखा रह जाए इसके लिए नेता पूरा जोर लगा दिए। लोकार्पण के बाद अब अधूरा का पूरा होता रहेगा, इसी तर्ज पर लोकार्पण का काम तेजी पकड़ रहा है।


कांग्रेस में बनते बिगड़ते समीकरण

कांग्रेस की अभी तक एक भी सूची फाइनल नही हुई है, जबकि दावेदारों की संख्या काफी ज्यादा रही है, कांग्रेस के समीकरण बनते बिगड़ते रहते है कब किस नेता का करीबी हो जाये और कब कौन किस नेता से दूर हो जाए ज्यादा हल्ला इसी बात का होते देखा गया है, वो महंत का करीबी है तो वो बाबा का एकदम करीबी है, इसलिए टिकट के दावेदार खुद को बड़े नेताओं के करीब जरूर बना चुके है, हल्ला यह भी है कि कुछ नेता तो दौड़ रायपुर से दिल्ली तक कर आये है। कुछ तो चुनाव के पहले जनता के बीच दौड़ लगा रहे थे उन्होंने अपनी रफ्तार पर ब्रेक लगाया है। पर टिकट किसे मिलती है ये समय बताएगा

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