रेट तो नहीं बढ़ा रहे नर्सिंग होम एक्ट
बीते एक साल से नर्सिंग होम एक्ट के तहत लैब, नर्सिंग होम, क्लिनिकों को दिए जाने वाले लाइसेंस की दर्जनों फ़ाइल स्वास्थ्य विभाग में अटकी हुई है, कभी ये कागज की कमी है कभी वो कागज की कमी बताकर लाइसेंस जारी नही किया जा रहा है, हल्ला है कि लाइसेंस में देरी के पीछे सिर्फ एक ही बताई जा रही है वो है रेट, ज्यादातर लोग ये मान के चल रहे है कि जिले का सबसे भ्रष्ट विभाग का मुँह ज्यादा बड़ा हो चुका है, लेट लतीफी के पीछे प्रशासन की इसमे भागीदारी देखी जा रही है, दरअसल, फ़ाइल की देरी की जानकारी प्रशासन को पल पल की है पर जानबूझकर मामले की अनदेखी उस पर शक करने को मजबूर कर रही है।
बिना लाइसेंस वाले ज्यादा खुश
एमसीबी और कोरिया जिले में ज्यादा लैब, क्लीनिक, नर्सिंग होम बिना लाइसेंस चल रहे है, कोरिया में इनकी सीधे स्वास्थ्य विभाग से सांठगांठ इसलिए नज़र आती है क्योंकि लाइसेंस नही होने के बाद ऐसे लोगो पर न नोटिस भेजा जा रहा है और न कार्यवाही कर रहे है, बीते 10 माह में एक भी लैब सील नही किये गए है। जबकि जो अपना पंजीयन करा कर लाइसेंस मांग रहे है उन्हें समय समय पर नोटिस जारी किया जा रहा है, ऐसे में हल्ला ये है कि बिना लाइसेंस वाले ज्यादा खुश है, स्वास्थ्य विभाग जानबूझकर ऐसे लोगो पर हाथ नही डाल रहा है, क्योंकि उन्ही की शह पर बिना पंजीयन धड़ल्ले से वो चल रहे है। हाथ डालने से कहीं उनकी पोल न खुल जाए।
मप्र से लाई गई भीड़?
19 सितंबर को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हरचोका पहुंचे, भीड़ को देख मुख्यमंत्री काफी खुश हुए, बताया गया आयोजन सफल रहा, कार्यक्रम को सफल बनाने प्रशासन ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया, भीड़ आई भी खूब, पर भीड़ मुख्यमंत्री के भाषण शुरू होते ही उठने लगी। हल्ला ये हो रहा है कि हरचोका मप्र की सीमा से लगा गांव है और कार्यक्रम में ज़्यादा संख्या में वाहनो में भर कर लोग मप्र से लाए गए थे, जो यहां के वोटर भी नही है। बहरहाल, अब आगामी चुनाव में इसका कितना लाभ मिलता है ये चुनाव का परिणाम ही बताएगा।
हारे नेताओं का मेला, दिग्गज नहीं दिखे
कोरिया में पहुंची भाजपा की परिवर्तन यात्रा में न किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री पहुंचा और न ही कोई बड़ा नेता, जबकि चिरमिरी से लेकर बगल के जिलों में गोवा और असम के मुख्यमंत्री तो चिरमिरी में दिग्गज नेता बृजमोहन अग्रवाल पहुंचे, कोरिया में सिर्फ प्रतिपक्ष के नेता नारायण चंदेल को छोड़ हारे हुए नेता रामसेवक पैकरा, अनुराग सिंहदेव, ओपी चौधरी, भइया लाल राजवाड़े देखे गए, और न ये नेता अपने भाषण से कार्यकर्ताओ में जोश भरते दिखे, खुल कर गुटबाजी दिखी, देर रात आई परिवर्तन यात्रा का संदेश जनता तक पहुंच नही पाया, सभा स्थल में सिर्फ भाजपाई ही नज़र आए, वैसे भाजपा की मीडिया कवरेज बीते 6 महीने से एकदम शून्य हो चुका है, परिवर्तन यात्रा भी मीडिया में अच्छी जगह नही बना पाया। अब हल्ला ये है भाजपा बैकुंठपुर सीट को एकदम हल्के में रही है या फिर कुछ तो है जो मैनेज है।
कब आएगी सूची..
भाजपा कांग्रेस दोनों ही दल विधायक उम्मीदवार के नामो की सूची का इंतजार कर रहे है, भाजपा की पहली सूची के बाद लंबा गेप हो गया है, अब माना जा रहा है कि पितृ पक्ष लगने के पूर्व दोनो दल अपने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर देंगे क्योंकि फिर नया काम पितृ पक्ष में नहीं होता है, 5 अक्टूबर के बाद आचार संहिता लगने की संभावना जताई जा रही है, दूसरी ओर कांग्रेस की भी सूची अब तक नही आई है, दोनो ही दल के उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चा गर्म है, पर टिकट किसे मिलता है ये देखने की बात होगी, उसके बाद जीत हार के समीकरण बदलेंगे।
पोस्टर पॉलिटिक्स
आचार संहिता लगी और शहर के सभी पोस्टर उतर जाएंगे, महज 15 दिन और पोस्टर पॉलिटिक्स पूरे उफान पर होगी, शहर के हर खंभे से लेकर दीवारों पर पोस्टर की भरमार है, सरकारी पोस्टर भी बहुतायत में दिख रहे है, कांग्रेस और भाजपा की पोस्टर पॉलिटिक्स में फिलहाल भाजपा आगे दिख रही है, शहर पोस्टर से भरा पड़ा है। वही इसे लेकर हल्ला ये है कि भाजपा के कई क्षेत्रों से आये विभिन्न नेताओं की नज़र दावेदारों पर पड़ रही है, और इसकी रिपोर्टिंग वो ऊपर कर रहे है, अब इसका इम्प्रेशन कैसा पड़ता है ये टिकट की सूची आने के बाद ही पता चलेगा।
अंत में एक सवाल..
ईंट भठ्ठे के संचालकों से खनिज को छोड़ किस विभाग ने बड़े पैमाने पर वसूली कर ली ?


