बैकुंठपुर। शनिवार शाम कल्पना नगर में एक दुकान के पास एक युवती कुछ सामान लेकर आकर बैठ गई। रात होने के बाद भी वह वहां से नहीं गई। आसपास के लोगों ने उसकी स्थिति को देखते हुए उसे भोजन कराया और रातभर उसकी सुरक्षा का ध्यान रखा। युवती मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत हो रही थी और अपना घर-पता स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रही थी।
मामले की जानकारी मिलने पर स्थानीय लोगों ने रात में सिटी कोतवाली पुलिस को सूचना दी। सूचना पर आरक्षक दीपक पांडेय और महिला आरक्षक मौके पर पहुंचे और युवती को अपने साथ ले जाने का प्रयास किया, लेकिन युवती ने पुलिस के साथ जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस और स्थानीय लोगों ने रातभर उस पर नजर बनाए रखी, ताकि वह सुरक्षित रहे।
सुबह मामले की जानकारी समाज कल्याण विभाग को दी गई। विभाग की उप संचालक ने तत्काल वृद्धाश्रम की टीम को मौके पर भेजा, लेकिन युवती की उम्र 60 वर्ष से कम होने के कारण वृद्धाश्रम में उसे रखा जाना संभव नहीं था। इसके बाद उप संचालक ने मामले की जानकारी महिला एवं बाल विकास विभाग के डीपीओ को दी।
इसके बाद शक्ति सदन की प्रमुख कल्पना शर्मा को मौके पर भेजा गया। वहीं समाजसेवी सुनील शर्मा ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए लोगों को 112 पर सूचना देने की सलाह दी और सखी सेंटर को भी युवती के संबंध में जानकारी दी।
112 पर सूचना मिलते ही टीम तत्काल मौके पर पहुंची। टीम ने युवती को काफी देर तक समझाया-बुझाया और भरोसा दिलाने के बाद उसे 112 वाहन में बैठाने में सफलता हासिल की। इसके बाद युवती को सकुशल सखी सेंटर पहुंचाया गया, जहां अब वह सुरक्षित है।
एक संवेदनशील पहल ने दिखाई इंसानियत की तस्वीर
इस पूरे घटनाक्रम में किसी एक विभाग या व्यक्ति की नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों, पुलिस, समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शक्ति सदन, समाजसेवियों और 112 टीम के समन्वित प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। रातभर लोगों ने युवती को अकेला नहीं छोड़ा और सुबह से लेकर उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने तक अलग-अलग स्तर पर प्रयास जारी रहे।
रविवार को अवकाश के दिन सभी अधिकारियों कर्मचारियों ने संवेदना दिखाते हुए इस काम मे सहयोग दिया।
यह घटना बताती है कि समाज, पुलिस और प्रशासन मिलकर संवेदनशीलता के साथ किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करें तो उसे सुरक्षित जीवन की ओर पहुंचाया जा सकता है। आज युवती सुरक्षित सखी सेंटर में है और इस पूरी पहल में शामिल सभी लोगों के सामूहिक प्रयास ने मानवीय संवेदना की एक सकारात्मक मिसाल पेश की है।





