सुकमा। कभी नक्सली गतिविधियों और भय के लिए पहचाने जाने वाला चिंतागुफा क्षेत्र अब बदलाव की नई तस्वीर पेश कर रहा है। सुरक्षा बलों की लगातार मौजूदगी, विकास कार्यों और शासन की योजनाओं की बढ़ती पहुंच के बीच पुलिस और ग्रामीणों के बीच संवाद का सिलसिला मजबूत हो रहा है। इसी कड़ी में सुकमा पुलिस ने ‘निवा दुवाड़ ते’ (आपके द्वार) अभियान के जरिए ग्रामीणों तक सीधे पहुंचने की पहल शुरू की है।
पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर के मार्गदर्शन में चल रहे अभियान के तहत पुलिस जवान गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद कर रहे हैं। पुलिस ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुन रही है और गांव की मूलभूत जरूरतों की जानकारी जुटा रही है। पानी, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी समस्याओं को चिन्हित कर संबंधित विभागों एवं प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
नक्सली प्रभाव से जनविश्वास की ओर बढ़ता क्षेत्र
चिंतागुफा सहित सुकमा जिले के कई इलाके लंबे समय तक नक्सली प्रभाव से प्रभावित रहे हैं। ऐसे क्षेत्रों में ग्रामीणों और सरकारी तंत्र के बीच दूरी बनी रही। अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ पुलिस ग्रामीणों के बीच पहुंचकर संवाद और विश्वास का माहौल तैयार करने में जुटी है। ‘निवा दुवाड़ ते’ अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
समस्याओं के साथ योजनाओं की जानकारी भी
अभियान के दौरान पुलिस ग्रामीणों की शिकायतें और स्थानीय समस्याएं सुनने के साथ उन्हें शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दे रही है। पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए संबंधित विभागों तक उनकी समस्याएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
सुकमा पुलिस का संदेश स्पष्ट है—“विश्वास का रिश्ता, संवाद के साथ।” कभी नक्सली खौफ के लिए पहचाने जाने वाले इलाकों में पुलिस का ग्रामीणों के घर-द्वार तक पहुंचना क्षेत्र में बदलते माहौल की तस्वीर सामने ला रहा है। सुरक्षा के साथ संवाद, विकास और जनविश्वास को प्राथमिकता देकर इन क्षेत्रों को शांति और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में प्रयास जारी हैं।

