बैकुंठपुर। आपातकाल के दौरान मीसा (MISA) के तहत जेल भेजे गए वरिष्ठ जनसंघ कार्यकर्ता एवं आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. निर्मल कुमार (एन.के.) घोष को 28 जून 2026 को रायपुर में आयोजित "आपातकाल स्मृति दिवस (काला दिवस)" कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर वे आपातकाल के दौरान अपने संघर्ष और जेल जीवन की यादों को साझा करेंगे।
डॉ. घोष ने बताया कि उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव बचपन से रहा। वर्ष 1942 में वे संघ की शाखा में शिशु, बाल एवं तरुण पथक के स्वयंसेवक रहे। बाद में सागर विश्वविद्यालय से बीएएमएस की डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने 24 मार्च 1960 को बैकुंठपुर में आयुर्वेद चिकित्सा सेवा शुरू की, लेकिन सामाजिक और राजनीतिक सरोकारों के कारण सक्रिय रूप से भारतीय जनसंघ से जुड़ गए।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंघ का विस्तार करने के लिए उन्होंने अनेक पदयात्राएं और आंदोलन किए। वर्ष 1965 में 71 ग्रामीणों के साथ करीब 85 किलोमीटर पैदल यात्रा कर अंबिकापुर पहुंचकर जनसंघ के पक्ष में जनजागरण किया। चावल की सांकेतिक जिला बंदी तोड़ने जैसे आंदोलनों में भी उन्होंने भाग लिया।
डॉ. घोष के अनुसार, 25 जून 1975 की रात देश में आपातकाल लागू होने के बाद लगभग दो बजे चार सशस्त्र पुलिसकर्मी उन्हें उनके घर से गिरफ्तार कर बैकुंठपुर कोतवाली ले गए। उस समय उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे थे और पूरा परिवार कठिन परिस्थितियों से गुजरा।
उन्होंने बताया कि पहले उन्हें बालाघाट जेल भेजा गया, जहां जेल में मिलने वाले भोजन और बंदियों की स्थिति को लेकर उन्होंने जेल प्रशासन से लगातार संघर्ष किया। जेल निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों के सामने अंग्रेजी में कहा— "Nothing is okay in the jail. Please come inside the Barrack and see what type of meals we are given to eat here in the jail." इसके बाद जेल में भोजन व्यवस्था में सुधार किया गया।
डॉ. घोष ने बताया कि बाद में उनका स्थानांतरण रायगढ़ जेल हुआ। उन्होंने दावा किया कि उनके जेल रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें पूरे 19 माह के कारावास के दौरान दो दिन की भी पैरोल नहीं मिली और उन्होंने बिना पैरोल के पूरा जेल जीवन बिताया।
उन्होंने कहा कि आपातकाल समाप्त होने के बाद अनेक लोग जनसंघ से जुड़ गए, लेकिन उस दौर में बैकुंठपुर में वास्तविक रूप से जनसंघ की विचारधारा को आगे बढ़ाने वाले कार्यकर्ताओं की संख्या बहुत कम थी। उन्होंने उस समय के कई वरिष्ठ जनसंघ कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का भी स्मरण किया।
डॉ. घोष ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को संबोधित करते हुए भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई, ग्रामीण विकास, पुस्तकालयों की स्थापना, स्थानीय निकायों में पारदर्शिता तथा झुमका बांध क्षेत्र में ओढ़नी ग्राम से फूलपुर तक पुल निर्माण जैसी मांगें भी रखी हैं।
उल्लेखनीय है कि 28 जून 2026 (रविवार) को रायपुर में आयोजित "आपातकाल स्मृति दिवस (काला दिवस)" कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान जेल यात्रा करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को आमंत्रित किया गया है। डॉ. एन.के. घोष भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे, जहां उनके संघर्षपूर्ण जीवन और लोकतंत्र की रक्षा के लिए दिए गए योगदान को याद किया जाएगा।


