मनेन्द्रगढ़। वन मंडल में हाल ही में निलंबित किए गए डीएफओ मनीष कश्यप चुपचाप बिना औपचारिक प्रभार सौंपे और बिना किसी विदाई समारोह के रायपुर रवाना हो गए। बताया जा रहा है कि नवपदस्थ डीएफओ ने एकतरफा तरीके से प्रभार ग्रहण कर लिया है, जिससे विभागीय हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
डीएफओ पर अचानक हुई कार्रवाई के बाद उनके करीबी अधिकारी-कर्मचारियों में खासा सन्नाटा देखा गया। विभागीय दफ्तरों में रात भर असामान्य खामोशी बनी रही और 10 फरवरी की सुबह करीब 9 बजे मनीष कश्यप रायपुर के लिए रवाना हो गए। सूत्रों के अनुसार उनसे जुड़े कई रेंजरों के चेहरों पर चिंता साफ झलक रही थी। उसी दिन कई रेंजर अपने कार्यालय समय पर नहीं पहुंचे, वहीं कर्मचारियों का कहना है कि डीएफओ के निलंबन से अधिकांश अधिकारी खुश नजर नहीं आए।
विभागीय सूत्रों का यह भी दावा है कि दिसंबर 2025 में कई रेंजरों से बड़ी मात्रा में एडवांस राशि ली गई थी, जिसे बाद में काम में समायोजित करने की बात कही गई थी। लेकिन डीएफओ के अचानक बदल जाने से अब उस राशि के फंसने की आशंका जताई जा रही है। कुछ सूत्र यह भी बताते हैं कि कार्यालय का एक बाबू कथित तौर पर “मिठाई-मलाई” लेकर रायपुर गया था, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
इधर पिछले एक माह से चल रहे मृदा कार्यों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों द्वारा करीब 30 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई, जबकि जमीनी हकीकत में महज 15 प्रतिशत काम होने की चर्चा है। इस मामले को लेकर भी विभागीय स्तर पर जांच की मांग उठने लगी है।

