कोरिया। जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद न तो निर्माण की सही निगरानी हो रही है और न ही सामने आई खामियों पर कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।
जमगहना हायर सेकेंड्री स्कूल भवन, जिसकी लागत लगभग 1 करोड़ 21 लाख रुपये बताई जा रही है, गुणवत्ताहीन निर्माण का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। भवन निर्माण में नियमों की अनदेखी के आरोप लगे, यहां तक कि निर्माण में बची राशि से बिना अनुमति सीसी सड़क का निर्माण करा दिया गया। इसके बावजूद आज तक न तो किसी जिम्मेदार अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ और न ही किसी तरह की जांच के आदेश दिए गए।
यही स्थिति बचरा पोड़ी के नव निर्मित तहसील भवन की भी है। 29 सितंबर 2025 को लोकार्पित इस भवन में महज चार महीने के भीतर ही बड़ी-बड़ी दरारें, बिना बारिश के छत से पानी का रिसाव, और कई जगहों पर प्लास्टर गायब होने जैसी गंभीर तकनीकी खामियां सामने आ चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह लापरवाही सीधे तौर पर निर्माण गुणवत्ता और इंजीनियरिंग निगरानी पर सवाल खड़े करती है।
सूत्रों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों और इंजीनियरों द्वारा इन मामलों में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। उल्टे खबर आने पर अधिकारियों बस इतना कह जाता है कि “आप लोग बस बदनामी करवा रहे हो।” यह बयान अपने आप में सिस्टम की सोच को उजागर करता है—मानो संदेश साफ हो कि काम में भ्रष्टाचार करो, लेकिन बदनामी मत होने दो।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि लोक निर्माण विभाग के निर्माण कार्यों में सरिए की गुणवत्ता की जांच, नींव में लोहे की चोरी रोकने के लिए मौके पर इंजीनियर की उपस्थिति, जैसी बुनियादी प्रक्रियाएं भी लगभग नदारद हैं। जांच के अभाव में घटिया सामग्री का खुलेआम इस्तेमाल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब सवाल यह है कि जब स्कूल और तहसील जैसे संवेदनशील सार्वजनिक भवनों की यह स्थिति है, तो अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। क्या प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा—इसका जवाब आने वाला वक्त देगा।

