कोरिया। जिले में समर्थन मूल्य पर हो रही धान खरीदी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सूत्रों के अनुसार पटना, जिल्दा, बड़े कलुआ सहित कुछ समितियों में धान के एडजस्टमेंट के नाम पर 26 रुपये प्रति बोरा डीओ खरीदे जाने की चर्चा आम है। बताया जा रहा है कि डीओ का पैसा तत्काल नहीं लिया जा रहा, बल्कि पेमेंट आने के बाद भुगतान करने का ऑफर दिया जा रहा है, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सत्यापन में भी दिख रहा झोल
जब अधिकारी सत्यापन के लिए समितियों और राइस मिलों का निरीक्षण करने पहुंचते हैं, तो यह कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है कि मिलर के पास धान कम है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया जाता कि किस खरीदी केंद्र से धान का उठाव कम हुआ है। जिले में समितियों में नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं, लेकिन पूरे दिन के सत्यापन में एक भी बोरा कम नहीं मिलना अपने आप में संदेह पैदा करता है।
वहीं दूसरी ओर, इस वर्ष खरीदे गए धान के भंडारण को लेकर जब जिला प्रशासन की टीम ने कुछ राइस मिलों में छापा मारा, तो वहां धान का स्टॉक कम पाया गया, लेकिन यह जानने का गंभीर प्रयास नहीं किया गया कि आखिर यह धान किस समिति या खरीदी केंद्र का है।
अन्य जिलों में कार्रवाई, कोरिया में खामोशी
सरगुजा संभाग के सूरजपुर, बलरामपुर सहित अन्य जिलों में जब धान की कमी पाई गई, तो संबंधित समितियों पर कड़ी कार्रवाई की गई। इसके उलट कोरिया जिले में राइस मिलों में धान कम मिलने और खरीदी केंद्रों में एडजस्टमेंट के आंकड़ों का आपस में मेल न खाना किसी बड़े खेल की ओर इशारा करता है।
जिले में लंबे समय से समितियों में एडजस्टमेंट को लेकर चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई न होना प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर रहा है। यदि समय रहते पूरे मामले की जांच नहीं हुई, तो शासन की धान खरीदी व्यवस्था की साख पर गहरा असर पड़ सकता है।

